हैदराबाद, 6 जून (आईएएनएस)। कोरोनावायरस संक्रमण के बढ़ते प्रकोप के बीच अपने गृह राज्यों में घर वापसी कर लौटे प्रवासी मजदूरों के कारण श्रम की कमी के चलते, अब निर्माण कंपनियां उन्हें वापस लाने की हर तरह से कोशिश कर रही हैं।
केंद्र सरकार द्वारा अनलॉक 1.0 के लॉन्च के बाद आर्थिक गतिविधि को फिर से शुरू करने के साथ ही कुछ प्रमुख कंपनियां श्रमिकों को फ्लाइट टिकट और अतिरिक्त भुगतान का लालच दे रही हैं, जिससे वह चल रही परियोजनाओं को समय सीमा के अंतर्गत पूरा कर सके।
बेंगलुरु की एक प्रमुख निर्माण फर्म के कॉन्ट्रेक्टर्स (ठेकेदारों) में से एक ने हैदराबाद में एक परियोजना पर काम करने के लिए बिहार से 10 कारपेंटर (बढ़ई) वापस लाने के लिए फ्लाइट टिकट की व्यवस्था की।
हालांकि, लॉकडाउन के दौरान कुछ कंपनियां श्रमिकों को घर वापस नहीं लौटने को लेकर समझा पाने में कामयाबी रही थी, लेकिन जिनकी मैनपॉवर कम हो गई है, वे अब श्रमिकों को वापस लाने के लिए प्रयत्नशील हैं।
परियोजनाओं के पूरा होने में देरी के कारण उन्हें होने वाले नुकसान से चिंतित कंपनियां श्रमिकों को वापस लाने के लिए अतिरिक्त धन खर्च करने के लिए भी तैयार हैं।
लॉकडाउन के दौरान कुछ प्रमुख कंस्ट्रक्शन कंपनियों ने निर्माण स्थलों या अन्य स्थानों पर प्रवासी श्रमिकों के रहने की सभी व्यवस्था की। उन्हें भोजन, चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने के साथ ही उनकी अच्छी तरह से देखभाल की जिम्मेदारी संभाली।
रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की तेलंगाना इकाई के एक सदस्य ने कहा, वे (कंपनियां) एक बड़ी संख्या में श्रमिकों को यहीं रूकने को लेकर आश्वस्त करने में सफल रहीं।
वास्तव में मजदूरों की वापसी लगभग एक महीने पहले शुरू हुई थी, जब बिहार के लगभग 300 श्रमिक चावल मिलों में काम करने के लिए ट्रेन के माध्यम से वापस तेलंगाना आए थे।
जब देश भर में फंसे प्रवासी श्रमिक राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के बीच अपने गृह राज्यों में लौटने के लिए आतुर थे, तब यह मजदूर 8 मई को हैदराबाद पहुंचे।
खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री गंगुला कमलाकर व अन्य अधिकारियों ने श्रमिकों के यहां पहुंचने पर फूलों के साथ उनका स्वागत किया था।
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