डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दुनियाभर में आज छठवां विश्व योग दिवस मनाया जा रहा है। न्यूयॉर्क से लेकर दिल्ली तक हर कोई अपने जीवन को निरोग बनाने के लिए योगाभ्यास कर रहा है। भारत के लद्दाख में 18 हजार फीट की ऊंचाई पर आईटीबीपी के जवानों के योगाभ्यास से लेकर प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद तक सभी ने योगाभ्यास कर देशवासियों को निरोगी रहने का संदेश दिया है। योग दिवस पर पीएम मोदी ने देश को संबोधित किया।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा, छठे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की आप सभी को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का ये दिन एकजुटता का दिन है। ये विश्व बंधुत्व के संदेश का दिन है। जो हमें जोड़े, साथ लाये वही तो योग है। जो दूरियों को खत्म करे, वही तो योग है। पीएम मोदी ने कहा, कोरोना के इस संकट के दौरान दुनिया भर के लोगों का My Life - My Yoga वीडियो ब्लॉगिंग कंपटीशन में हिस्सा लेना, दिखाता है कि योग के प्रति उत्साह कितना बढ़ रहा है।
पीएम मोदी ने कहा, बच्चे, बड़े, युवा, परिवार के बुजुर्ग, सभी जब एक साथ योग के माध्यम से जुडते हैं, तो पूरे घर में एक ऊर्जा का संचार होता है। इसलिए, इस बार का योग दिवस, भावनात्मक योग का भी दिन है, हमारी पारिवारिक बंधन को भी बढ़ाने का दिन है। कोविड-19 वायरस खासतौर पर हमारे श्वसन तंत्र, यानि कि श्वास तंत्र पर अटैक करता है। हमारे श्वास तंत्र को मजबूत करने में जिससे सबसे ज्यादा मदद मिलती है वो है प्राणायाम, यानि कि सांस लेने का व्यायाम है।
पीएम मोदी ने कहा, आप प्राणायाम को अपने रोजना के अभ्यास में जरूर शामिल करिए, और अनुलोम-विलोम के साथ ही दूसरी प्राणायाम तकनीक को भी सीखिए। स्वामी विवेकानंद कहते थे- “एक आदर्श व्यक्ति वो है जो नितांत निर्जन में भी क्रियाशील रहता है, और अत्यधिक गतिशीलता में भी सम्पूर्ण शांति का अनुभव करता है”। किसी भी व्यक्ति के लिए ये एक बहुत बड़ी क्षमता होती है। योग का अर्थ ही है- ‘समत्वम् योग उच्यते’ अर्थात, अनुकूलता-प्रतिकूलता, सफलता-विफलता, सुख-संकट, हर परिस्थिति में समान रहने, अडिग रहने का नाम ही योग है।
पीएम मोदी ने कहा, गीता में भगवान कृष्ण ने योग की व्याख्या करते हुए कहा है- ‘योगः कर्मसु कौशलम्’ अर्थात्, कर्म की कुशलता ही योग है। कर्म ही योग है। कर्म की कुशलता ही योग। पीएम मोदी ने कहा, हमारे यहां कहा गया है कि युक्त आहार विहारस्य, युक्त चेष्टस्य कर्मसु। युक्त स्वप्ना-व-बोधस्य, योगो भवति दु:खहा।। इसका अर्थ है कि सही खान-पान, सही ढंग से खेल-कूद, सोने-जागने की सही आदतें, और अपने काम, अपनी duties को सही ढंग से करना ही योग है। एक सजग नागरिक के रूप में हम परिवार और समाज के रूप में एकजुट होकर आगे बढ़ेंगे। हम प्रयास करेंगे कि Yoga at home and Yoga with family को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। हम ज़रूर सफल होंगे, हम ज़रूर विजयी होंगे।
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