डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वस्तु एवं सेवा कर परिषद (जीएसटी काउंसिल) की आज 41वीं बैठक होने जा रही है। 11 बजे से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये होने वाली इस अहम बैठक में केद्र सरकार द्वारा राज्यों को जीएसटी मुआवजा देने पर विचार-विमर्श किया जाएगा। बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को उन राज्यों की ओर से दबाव का भी सामना करना पड़ सकता है जो जीएसटी मुआवजे की मांग कर रहे हैं। केंद्र की तरफ से राज्यों को दिये जाने वाले जीएसटी मुआवजे के लगभग 44 हजार करोड़ रुपये बकाया हैं। यह बैठक पहले जुलाई में ही होने वाली थी।
जीएसटी काउंसिल परिषद का सिंगल प्वाइंट एजेंडा जीएसटी के मुआवजे पर विचार-विमर्श है। जीएसटी की दरों या उपकर की संरचना में किसी भी प्रकार का बदलाव का मसला भी इस बात से जुड़ा होगा कि राज्यों को किस प्रकार समय से मुआवजे का भुगतान हो।
कोरोना महामारी की रोकथाम को लेकर किए गए देशव्यापी लॉकडाउन और उससे देशभर में आर्थिक गतिविधियों के प्रभावित होने के चलते जीएसटी संग्रह में भारी कमी आई है। इसलिए केंद्र सरकार के पास एक विकल्प यह है कि वह अपनी उधारी के एक हिस्से का उपयोग राज्यों को जीएसटी मुआवजे के भुगतान के रूप में कर सकती है। मार्च के बाद राज्यों को मुआवजे का भुगतान नहीं किया गया है। यहां तक कि मार्च के मुआवजे के भुगतान में भी विलंब हुआ और जुलाई के आखिर में ही भुगतान हो पाया।
केंद्र सरकार ने इस मसले पर कानूनी राय भी मांगी थी जिसमें सुझाव दिया गया था कि, केंद्र पर राज्यों को जीएसटी मुआवजे में कमी का भुगतान करने का कोई दायित्व नहीं है, बल्कि जीएसटी परिषद पर्याप्त राशि की व्यवस्था करके वस्तु एवं सेवा कर मुआवजा कोष में कमी को पूरा करने का निर्णय ले सकती है।
सूत्रों ने बताया, न्यायविदों के सुझाव के अनुसार, जीएसटी परिषद केंद्र को मुआवजा कोष से राज्यों को उधारी लेने की अनुमति देने की सिफारिश कर सकती है। हालांकि संविधान के अनुच्छेद 293 (3) के तहत इस मामले में आखिरी फैसला केंद्र सरकार को लेना होगा।
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