बेंगलुरु, 4 दिसंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने बुधवार को तीन लोगों को जाली नोट रैकेट मामले में गिरफ्तारी के तीन साल बाद दोषी करार दिया।
एनआईए की विशेष अदालत ने तीनों दोषियों, मोहम्मद सज्जाद अली, एम. जी. राजू और अब्दुल कादिर को दोषी ठहराया और उन्हें 20,000 रुपये के जुमार्ने के साथ छह साल की कैद की सजा सुनाई।
यह मामला मदनायकहल्ली पुलिस द्वारा मार्च 2018 में बेंगलुरु शहर के विभिन्न हिस्सों से चार आरोपियों मोहम्मद सज्जाद अली, एम. जी. राजू, गंगाधर रमप्पा कोलार और वनिता की गिरफ्तारी के साथ शुरू हुआ था।
चारों पर भारतीय दंड संहिता की 489बी (जाली नोट का उपयोग करने), 489सी (जाली नोट रखने), 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
इसके बाद इस मामले को सितंबर 2018 में एनआईए ने अपने नियंत्रण में ले लिया। उनकी गिरफ्तारी के समय, मदनायकहल्ली पुलिस ने उनसे 6,84,000 रुपये के जाली नोट बरामद किए थे, जो 2,000 के नोटों के तौर पर थे।
एनआईए ने एक बयान में कहा, जांच के दौरान, कर्नाटक से विजय और सबीरुद्दीन और पश्चिम बंगाल के मालदा से अब्दुल कादिर और जहीरुद्दीन की भागीदारी सामने आई।
बयान में कहा गया है कि आरोपी जहीरुद्दीन अभी भी फरार है, जबकि विजय, साबिरुद्दीन और अब्दुल कादिर को गिरफ्तार कर लिया गया।
एनआईए ने अपने बयान में कहा, एनआईए ने जांच पूरी करने के बाद तीन गिरफ्तार आरोपियों -- मोहम्मद सज्जाद अली, एमजी राजू, गंगाधर रमप्पा कोलार और वनिता के खिलाफ 3 नवंबर, 2019 को चार्जशीट दायर की और 8 मार्च 2019 को अब्दुल कादिर के खिलाफ पूरक आरोप-पत्र दर्ज किए गए, वहीं 5 सितंबर, 2019 को सबिरुद्दीन और 20 जून, 2020 को विजय के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया।
उन्होंने उल्लेख किया कि बाकी चार आरोपियों के खिलाफ ट्रायल जारी है।
फरार आरोपी जहीरुद्दीन के खिलाफ भी आगे की जांच जारी है।
एमएनएस-एसकेपी
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