डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट आज किसान आंदोलन और कृषि कानूनों से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की पिछली सुनवाई 17 दिसंबर को की थी। वहीं कोर्ट ने कानूनों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 12 अक्टूबर को सरकार से जवाब तो मांगा, लेकिन कानून पर रोक नहीं लगाई थी। ऐसे में सुनवाई के दौरान अगर कानूनों से देश के बड़े हिस्से में किसानों को फायदे की बात सामने आती है, तो कोर्ट शायद ही उस पर रोक लगाएगा।
पिछली सुनवाई में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि उसके और किसान संगठनों के बीच सभी मुद्दों पर स्वस्थ चर्चा जारी है। इस बात की संभावना है कि दोनों पक्ष निकट भविष्य में किसी समाधान पर पहुंच जाएं। लेकिन अब तक इस मसले का कोई हल नहीं निकल पाया है। ऐसे में चीफी जस्टिस एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली बेंच की सुनवाई काफी महत्वपूर्ण है।
बता दें कि किसान करीब डेढ़ महीने से तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ सड़कों पर डटे हैं। कई दौरों की बातचीत के बाद भी अब तक इस मसले का कोई हल नहीं निकल पाया है। किसान चाहते हैं कि तीन कृषि कानूनों को सरकार वापस ले। किसान यह भी चाहते हैं कि सरकार किसी भी तरह की खरीद में न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी की गारंटी दे। वहीं सरकार सीधे तौर पर कह चुकी है कि कृषि कानून वापस नहीं लिए जाएंगे, लेकिन किसान इन कानूनों में जो भी संशोधन करने को कहते हैं वह उस पर विचार करने को तैयार है।
ऐसे में अगर कल अगर कोर्ट सुनवाई नहीं टालता है तो वह मुख्य रूप से 3 मुद्दों पर विचार करेगा। पहला- किसानों को सड़क से हटा कर प्रदर्शन के लिए तय जगह पर भेजना। दूसरा- विवाद के हल के लिए अपनी तरफ से एक कमिटी के गठन करना। तीसरा- कानूनों की वैधता पर सुनवाई लंबित रहने के दौरान उनके अमल पर रोक लगाना।
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