नई दिल्ली, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। कोरोनावायरस संक्रमण की रोकथाम के मद्देनजर देश में लागू लॉकडाउन के बीच जनजातीय कार्य मंत्रालय ने कहा कि आदिवासियों के बनाए मास्क की आपूर्ति होने पर उनकी आजीविका का सृजन होगा।
दरअसल, देशव्यापी लॉकडाउन के बीच जनजातीय कार्य मंत्रालय के सामने सबसे बड़ी चुनौती आदिवासी लोगों के जरिए तैयार की जा रहे वन उत्पादों को बाजार मुहैया कराना है। ऐसे में मंत्रालय के तहत काम कर रही ट्रायफेड जनजातीय कारीगरों, स्वयं सहायता समूह, वन धन लाभार्थियों, एनजीओ आदि के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि हथकरघा, हस्तशिल्प और प्राकृतिक उत्पादों को विपणन की सुविधा मिल सके।
कोरोना महामारी को देखते हुए कुछ आपूर्तिकर्त्ताओं ने स्वयं और जनजाति समुदाय के लोगों को सहायता करने के लिए घर पर ही मास्क बनाने का काम शुरू कर दिया है। इन लोगों द्वारा तैयार मॉस्क को आपूर्तिकर्त्ता स्थानीय प्राधिकरणों को आपूर्ति कर रहे हैं।
जनजाति कार्य मंत्रालय ने जनजातीय समूह द्वारा तैयार मास्क से केंद्र सरकार को सहायता प्रदान करने की इच्छा जाहिर की है।
मंत्रालय ने कहा, मास्क की आपूर्ति होने की सुरत में जनजातीय लोगों की आजीविका सृजन होगा। इसके अलावा ट्राइफेड अन्य आपूर्तिकर्त्ताओं की पहचान करने का प्रयास कर रहा है, जो संकट की इस घड़ी में मॉस्क ले सकें।
गौरतलब है कि कोविड-19 संक्रमण के कारण मौजूदा संकट की स्थिति ने पूरे देश में एक अभूतपूर्व खतरा उत्पन्न कर दिया है। देश के लगभग सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इससे कमोबेश प्रभावित हैं। इस खतरे ने व्यापार और उद्योग के सभी क्षेत्रों के सभी स्तरों तथा समाज के सभी हिस्सों को प्रभावित किया है। गरीब और सीमांत इस वैश्विक महामारी से सबसे अधिक प्रभावित हैं। यह समय फसल कटाई तथा गैर-काष्ठ वन उत्पाद के संग्रह का भी है। ऐसे में जनजातीय कार्य मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि घर मे बने मास्क का इस्तेमाल करें।
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