डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नए कृषि कानूनों के खिलाफ देश के किसान लगभग डेढ़ महीने से दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे हैं। अन्नदाता जिन कृषि कानूनों को लेकर उद्वेलित हैं, उन्हीं कानूनों को पास करने वाली लोकसभा में कुल 239 सांसद खुद को किसान बताते हैं। यह अलग बात है कि इन 239 में से सिर्फ 22 किसान सांसदों को ही लोकसभा में कृषि विधेयकों पर बोलने का मौका मिल पाया।
103 सांसदों का पेशा है सिर्फ खेती-किसानी
पार्लियामेंट्री बिजनेस के मुताबिक जिन 239 लोकसभा सदस्यों ने खुद को किसान बताया है, उनमें से 103 सांसदों ने अपने प्रोफाइल में खुद को सिर्फ किसान बताया है। मतलब यह कि 103 सांसदों का पेशा सिर्फ खेती-किसानी ही है। जबकि 136 सांसद ऐसे हैं जिन्होने अपने पेशे वाले कॉलम में किसान के साथ सामाजिक कार्यकर्त्ता, व्यवसायी, इंजीनियर, बिल्डर आदि भी बताया है। खास बात यह कि खेती-किसानी को अपना पेशा बताने वालों में मोदी सरकार के 14 मंत्री भी शामिल हैं। इनमें केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह, परिवहन मंत्री नितीन गडकरी, कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, पर्यटन मंत्री प्रहलाद पटेल, वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर, खाद्य एवं आपूर्ति राज्य मंत्री राव साहेब दानवे, इस्पात राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते का नाम प्रमुखता से है।
शुद्ध रूप से किसान हैं धानोरकर, राणा
सिर्फ खेती-किसानी को अपना पेशा बताने वालों में महाराष्ट्र के आधा दर्जन से ज्यादा सांसद भी हैं। इनमें नितीन गडकरी, राव साहब दानवे, बालू धानोरकर, नवनीत राणा, संजय जाधव, प्रताप जाधव, सुनील तटकरे ने खुद को शुद्ध रूप से किसान बताया है। इसके अलावा भावना गवली जैसे राज्य के लगभग दर्जन भर सांसद भी हैं जिन्होने खुद को किसान के साथ व्यवसायी, सामाजिक कार्यकर्त्ता, शिक्षाविद् आदि बताया है।
भाजपा में हैं सबसे ज्यादा किसान सांसद
पार्लियामेंट्री बिजनेस के आंकड़े बताते हैं कि लोकसभा में सबसे ज्यादा 113 किसान सांसद भाजपा के हैं। मतलब यह कि भाजपा के कुल 303 में से 113 सांसद खुद को किसान बताते हैं। दूसरे नंबर पर है कांग्रेस है जिसके 13 सांसद खुद को किसान बताते हैं। जदयू और शिवसेना के 7-7 सांसद किसान हैं तो वाईएसआर कांग्रेस के 6 सांसदों ने खुद को किसान बताया है। राजस्थान से आरएलपी के सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी खुद को किसान बताया है। बता दें कि बेनीवाल कृषि कानूनों के खिलाफ न केवल खुलकर किसानों के साथ आ चुके हैं, बल्कि इन्होने इसे मुद्दा बनाकर राजग से अपना नाता भी तोड़ लिया है।
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