पंजाब CM का ऐलान: आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों के परिजनों को 5 लाख रुपए और नौकरी देंगे, अब तक 53 की मौत 

डिजिडल डेस्क, चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बड़ा ऐलान किया है। पंजाब सीएम ने शुक्रवार को कहा कि कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों के परिवार के एक-एक सदस्य को नौकरी और पांच-पांच लाख रुपए का मुआवजा दिया जाएगा।

बता दें कि कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े किसान दिल्ली की सीमाओं पर 58 दिन से प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं शुक्रवार को किसान संगठनों और सरकार के बीच 11वें दौर की बैठक भी बेनतीजा रही। वहीं अगली मीटिंग के लिए कोई तारीख तय नहीं की गई। किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने बताया कि सरकार ने हमें अपने प्रस्तावों पर विचार करने के लिए कहा है। वह अब बातचीत का सिलसिला बंद कर रही है। यही बात कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने भी कही।

तोमर के बयान से लगा, आगे बातचीत के आसार नहीं
मीटिंग के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर कहा कि हमने 12 राउंड की बैठकें कीं। जब यूनियन कानून वापसी पर अड़ी रही तो हमने उन्हें कई विकल्प दिए। आज भी हमने उन्हें कहा है कि सभी विकल्पों पर चर्चा करके आप अपना फैसला हमें कल बताइए। तोमर ने कहा कि इतने दौर की बातचीत के बाद भी नतीजा नहीं निकला, इसका हमें खेद है। फैसला न होने का मतलब है कि कोई न कोई ताकत है, जो इस आंदोलन को बनाए रखना चाहती है और अपने हित के लिए किसानों का इस्तेमाल करना चाहती है। ऐसे में किसानों की मांगों पर फैसला नहीं हो पाएगा।

पिछली मीटिंग में कानूनों को होल्ड करने पर बात हुई
इससे पहले बुधवार को हुई पिछली बातचीत में सरकार ने प्रपोजल दिया था कि कृषि कानूनों को डेढ़ साल तक होल्ड कर सकते हैं। इसके बाद उम्मीद जगी कि अब शायद किसान मान जाएं, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। किसान नेताओं ने गुरुवार को दिन भर बैठकें करने के बाद देर रात कहा था कि सरकार का प्रपोजल मंजूर नहीं। उन्होंने कहा कि कानून रद्द होने चाहिए, और MSP की गारंटी मिलनी चाहिए।

अब तक 53 किसानों ने जान गंवाई
बता दें कि बीते साल 26 नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर हजारों किसान प्रदर्शन कर रहे हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान कई लोगों ने जान भी गंवाई है। पंजाब सरकार के मुताबिक, आंदोलन के दौरान अब तक 53 लोगों की जान जा चुकी है। इनमें से 20 की जान पंजाब में और 33 की दिल्ली की सीमाओं पर गई है। किसान कृषि कानूनों को रद्द किए जाने की मांग कर रहे हैं। जिन कारणों से किसानों की जान गई, उनमें सड़क दुर्घटना से लेकर ठंड तक जैसे कारण शामिल हैं। वहीं कुछ ने ख़ुद अपनी जान ले ली।



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Will give 5 lakh more jobs to the relatives of farmers who lost their lives during the movement
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