डिजिटल डेस्क,नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के नोवल कोरोना वायरस की मुफ्त जांच के आदेश पर निजी लैब के मालिकों ने ऐतरात जताया है। इन लैबों का कहना है कि कोविड-19 की मुफ्त जांच के लिए उनके पास साधन नहीं है। सरकार को कोई रास्ता निकालना चाहिए, जिससे प्राइवेट लैब बढ़ती मांग के बीच जांच का काम कर सके।
डॉ. डैंग्स लैब के सीईओ डॉक्टर अर्जुन डैंग ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश को स्वीकार करते हैं जिसका उद्देश्य कोरोना वायरस जांच की पहुंच बढ़ाने और जनता के लिए सरल बनाना है। उन्होंने कहा कि निजी लैबों के लिए कई चीजों की लागत तय है। जिनमें रीएजेंट्स, उपभोग की वस्तु, वर्कर और उपकरणों के रखरखाव शामिल हैं।
डॉ. डैंग ने कहा, 'कोविड-19 की जांच में संक्रमण नियंत्रण के लिए कई उपाय करने पड़ते हैं। जैसे व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण, संक्रामक परिवहन तंत्र और साफ-सफाई की जरूरत।' उन्होंने कहा कि सरकारी दर 4500 रुपए की दर में प्राइवेट लैब मुश्किल से लागत निकाल पाती है। डैंग ने कहा, 'कोर्ट के आदेश का पलन करते हुए हम अभी मुफ्त जांच कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि सरकार की तरफ से सभी चीजों को जल्द ही स्पष्ट किया जाएगा।'
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थायरोकेयर टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डॉ. ए वेलुमनी ने कहा कि प्राइवेट लैब के पास महंगी जांच मुफ्त करने का साधन नहीं है। उन्होंने कहा, 'यह सरकार का कर्तव्य है कि वह लागत का भुगतान करे, हम बिना प्रॉफिट के काम करेंगे।' सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सरकार को कोई रास्ता निकालना चाहिए, हम निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं।
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