डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को वैश्विक जलवायु शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए जलवायु परिवर्तन की चुनौती से लड़ने के लिए भारत की ओर से उठाए गए कदमों का जिक्र किया। उन्होंने दुनिया को बताया कि किस तरह से उत्सर्जन कम करने से लेकर अक्षय ऊर्जा पर जोर देकर जलवाय परिवर्तन की चुनौती से भारत में लड़ाई चल रही है।
ऐतिहासिक पेरिस जलवायु समझौते की पांचवीं वर्षगांठ पर संयुक्त राष्ट्र की ओर से आयोजित वैश्विक जलवायु शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, भारत न केवल पेरिस समझौते के लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में कार्य कर रहा है, बल्कि इससे भी आगे जाकर नए कदम उठा रहा है। भारत न केवल अपने टारगेट पूरा करेगा, बल्कि आपकी आकांक्षाओं और अपेक्षाओं पर भी खरा उतरेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दौरान हानिकारक गैसों के उत्सर्जन को कम करने, अक्षय ऊर्जा की स्थापित क्षमता में लगातार वृद्धि करने जैसे कदमों का विशेष तौर पर उल्लेख किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, वर्ष 2047 को भारत आधुनिक स्वतंत्र देश के सौ साल के रूप में मनाएगा। वर्ष 2047 का भारत न केवल अपने लक्ष्य पूरा करेगा बल्कि आप सबकी अपेक्षाओं को भी पूरा करेगा।
भारत ने उत्सर्जन कम किया
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमने साल 2005 के मुकाबले अपनी उत्सर्जन की गति को 21 फीसदी कम किया है। हमारी सौर ऊर्जा क्षमता वर्ष 2014 में 2.63 गीगा वाट थी जो साल 2020 तक आते आते बढ़कर 36 गीगा वाट हो गई है। हमारी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विश्व में चौथे स्थान पर है। उन्होंने आशा जताई कि यह साल 2022 से पहले बढ़कर 175 गीगा वाट हो जाएगी।
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